कल्पना चावला : अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की प्रथम महिला(17 मार्च 1962- 1 फरवरी 2003) प्रस्तावना कल्पना चावला विज्ञान, साहस और मानवीय संकल्प की वह अद्भुत मिसाल हैं, जिन्होंने सीमाओं और परिस्थितियों को पीछे छोड़कर अंतरिक्ष तक भारत का नाम रोशन किया। वे भारतीय मूल की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री थीं, जिनका जीवन आज भी करोड़ों युवाओं—विशे…
Read more1.Who were the 'Liberals' in 19th-century Europe? 2. What were the three main changes suggested by Lenin in his 'April Theses'? 3.Define 'Kulaks' and 'Kolkhoz'. 4.What was the 'Duma'? 5.Mention two effects of the First World War on Russian industries. Mark Questions (Short Answ…
Read moreडॉ. राजा रमन्ना: भारतीय परमाणु कार्यक्रम के महाशिल्पकार(28 जनवरी 1925- 24 सितंबर 2004) डॉ. राजा रमन्ना आधुनिक भारत के उन यशस्वी वैज्ञानिकों में से हैं, जिन्होंने देश को वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और सामरिक शक्ति के शिखर पर पहुँचाया। वे न केवल एक प्रख्यात परमाणु भौतिक विज्ञानी थे, बल्कि एक दूरदर्शी प्रशासक भी थे, जिन्होंने भारत के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रमों क…
Read moreभोगेंद्र झा: मिथिलांचल के जननायक और किसान आंदोलन के पुरोधा(13 सितंबर 1923- 24 जनवरी 2000) प्रारंभिक जीवन और शिक्षा भोगेंद्र झा का जन्म 13 सितंबर 1923 को बिहार के मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड के कलना गाँव में हुआ था। छात्र जीवन से ही उनमें अन्याय के विरुद्ध लड़ने का जज्बा था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के दौरान ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेना …
Read moreओशो: रूढ़ियों के विध्वंसक और चेतना के उत्सव(11 दिसंबर 1931- 19 जनवरी 1990 ) भूमिका बीसवीं सदी के इतिहास में यदि कोई ऐसा व्यक्तित्व हुआ जिसने धर्म की जड़ता को हिलाकर रख दिया, तो वह निश्चित रूप से आचार्य रजनीश 'ओशो' थे। वे केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि एक विद्रोही चेतना थे, जिन्होंने मनुष्य को परंपराओं की बेड़ियों से मुक्त होकर स्वयं की…
Read moreमहाराणा प्रताप: स्वाभिमान, त्याग और स्वतंत्रता के अमर प्रतीक( मई 1540 ईस्वी- 19 जनवरी 1597 ईस्वी) भूमिका भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम ऐसे महान योद्धा के रूप में अंकित है, जिसने विदेशी सत्ता के सामने कभी भी आत्मसमर्पण नहीं किया। वे केवल मेवाड़ के शासक ही नहीं थे, बल्कि भारतीय स्वाधीनता, क्षात्र धर्म और आत्मगौरव के सजीव प्रतीक थे। उनक…
Read moreहरिवंश राय बच्चन(27 नवंबर 1907- 18 जनवरी 2003 ) भूमिका हिंदी साहित्य के इतिहास में यदि किसी कवि ने भावनाओं को सरल भाषा, मधुर संगीतात्मकता और जीवनदर्शन के साथ जनमानस तक पहुँचाया, तो वे थे डॉ. हरिवंश राय बच्चन । उनकी रचनाएँ हिंदी कविता को नई दिशा प्रदान करती हैं—जहाँ मानव-मन की पीड़ा, उल्लास, संघर्ष, प्रेम, विरक्ति और जीवन के विविध रंग बेहद सहज …
Read moreमहादेव गोविंद रानाडे : भारतीय सामाजिक-धार्मिक पुनर्जागरण के अग्रदूत(18 जनवरी 1842 - 16 जनवरी 1901 ) भूमिका महादेव गोविंद रानाडे उन्नीसवीं शताब्दी के भारत के उन महान चिंतकों में अग्रणी हैं, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में सामाजिक सुधार, धार्मिक उदारवाद, आर्थिक चिंतन और संवैधानिक राष्ट्रवाद को एक साथ दिशा दी। वे न्यायाधीश, विद्वान, इतिहासकार, अर्थशास…
Read moreदरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी (22 अक्टूबर 1932- 12 जनवरी 2026) भूमिका दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन और उनका व्यक्तित्व भारतीय राजशाही के उस युग का प्रतिनिधित्व करता है जो सेवा, दान और परंपराओं के प्रति निष्ठा के लिए जाना जाता है। उनके निधन से न केवल एक युग का अंत हुआ है, बल्कि मिथिलांचल की संस्कृति का एक महान …
Read moreअंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा : भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री(जन्म 13 जनवरी 1949) भूमिका राकेश शर्मा भारत के इतिहास में वह स्वर्णिम नाम हैं जिन्होंने देश को अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक पहुँचाने का गौरव प्रदान किया। वे भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्होंने 3 अप्रैल 1984 को सोवियत संघ के अंतरिक्ष यान सोयूज़ टी-11 (Soyuz T-11) से अंतरिक्ष की यात्…
Read moreकेशव चंद्र सेन : ब्रह्म समाज के महान समाज-सुधारक(19 नवम्बर 1838 ई. - 8 जनवरी 1884 ई. ) भूमिका उन्नीसवीं शताब्दी का भारत सामाजिक कुरीतियों, धार्मिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक प्रभावों के बीच नवजागरण की दिशा में अग्रसर था। इस काल में अनेक समाज-सुधारकों ने भारतीय समाज को नई चेतना प्रदान की। केशव चंद्र सेन (1838–1884) ऐसे ही प्रखर चिंतक, धर्मसुधारक और वक…
Read moreकमलेश्वर : नई कहानी आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर((6 जनवरी 1932 – 27 जनवरी 2007) भूमिका हिंदी साहित्य के आधुनिक इतिहास में कमलेश्वर (6 जनवरी 1932 – 27 जनवरी 2007) एक ऐसे रचनाकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं, जिन्होंने कथा-साहित्य को सामाजिक यथार्थ, राजनीतिक चेतना और मानवीय संवेदना से गहराई से जोड़ा। वे कथाकार, उपन्यासकार, निबंधकार, संपादक और मीडिया-व्य…
Read moreभारतेंदु हरिश्चन्द्र: आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक(9 सितंबर1850–6 जनवरी1885) भारतेंदु हरिश्चन्द्र हिंदी साहित्य के उस युगप्रवर्तक रचनाकार का नाम है, जिन्होंने हिंदी को केवल काव्य की भाषा न रहने देकर उसे गद्य, नाटक, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना का प्रभावी माध्यम बनाया। उन्हें ससम्मान “आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक” कहा जाता है। उनका जीवन अल्पायु का र…
Read moreपरमहंस योगानंद जी : पूर्व और पश्चिम के बीच आध्यात्मिक सेतु (5 जनवरी 1893 – 7 मार्च 1952) परमहंस योगानंद (5 जनवरी 1893 – 7 मार्च 1952) आधुनिक युग के महान योगी, संत, दार्शनिक और विश्वविख्यात आध्यात्मिक शिक्षक थे। वे उस विरल परंपरा के प्रतिनिधि हैं जिन्होंने भारतीय योग-दर्शन को वैज्ञानिक, सार्वभौमिक और व्यावहारिक रूप में विश्व के सामने प्रस्तुत कि…
Read moreराहुल देव बर्मन : भारतीय संगीत के प्रयोगधर्मी जादूगर(27 जून 1939 - 4 जनवरी 1994) भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में जिन संगीतकारों ने परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का कार्य किया, उनमें राहुल देव बर्मन—लोकप्रिय नाम पंचम दा—का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। वे केवल एक संगीतकार नहीं थे, बल्कि ध्वनियों के वैज्ञानिक, लय के दार्शनिक और प्रयोगों के निर्भीक कल…
Read moreक्रांतिकारी विठ्ठल लक्ष्मण कोतवाल (6 सितंबर 1916 – 2 जनवरी 1943) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल बड़े नगरों और प्रसिद्ध नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें ग्रामीण अंचलों के ऐसे असंख्य वीर सपूत भी शामिल हैं, जिन्होंने गुमनामी में रहते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। विठ्ठल लक्ष्मण कोतवाल ऐसे ही एक महान, निर्भीक और त्यागमय क्रांतिकारी थे,…
Read moreमोरेश्वर वासुदेव अभ्यंकर: जीवन, संघर्ष और राष्ट्र सेवा ( 19 अगस्त 1886- 2 जनवरी 1935) प्रारंभिक जीवन और जन्म मोरेश्वर वासुदेव अभ्यंकर का जन्म 19 अगस्त 1886 को महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्रों में हुआ था। वे एक शिक्षित और संवेदनशील परिवार में जन्मे, जिन्होंने शुरू से ही देश की सामजिक-राजनैतिक परिस्थितियों को गहराई से समझा और अंग्रेजी शासन के अत्या…
Read moreवैज्ञानिक शांति स्वरूप भटनागर : भारतीय विज्ञान के संगठनकर्ता और पथप्रदर्शक(21 फ़रवरी 1894- 1 जनवरी 1955) भूमिका डॉ. शांति स्वरूप भटनागर आधुनिक भारत के उन महान वैज्ञानिकों में अग्रणी हैं, जिन्होंने न केवल मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान किया, बल्कि भारत में वैज्ञानिक संस्थाओं की सुदृढ़ नींव रखी। उन्हें सही अर्थों में “आधुनिक भारतीय विज्ञान का शिल्पकार” …
Read moreवैज्ञानिक सत्येन्द्र नाथ बोस : आधुनिक क्वांटम भौतिकी के पुरोधा(1 जनवरी 1894- 4 फ़रवरी 1974) भूमिका भारतीय वैज्ञानिक परंपरा में जिन व्यक्तित्वों ने विश्व-विज्ञान को मौलिक दिशा प्रदान की, उनमें प्रोफेसर सत्येन्द्र नाथ बोस का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है। वे न केवल एक महान भौतिक विज्ञानी थे, बल्कि ऐसे चिंतक और शिक्षक भी थे, जिनकी वैज्ञानिक दृष्टि ने …
Read moreUNPACKING GENDER (D) ANSWER THE FOLLOWING QUESTIONS IN BRIEF- 1.Write one example of each stereotypical gender roles of boys and girls. Answer- Males are told boys donot cry and are given guns and car as boys and girls are given dolls and play houses, so that they can play the traditional fem…
Read more(D) ANSWER THE FOLLOWING QUESTIONS IN BRIEF-- 1.QUESTION Name the types of vegetation of the world. ANSWER The vegetation belts of the world can broadly be divided into various groups on the basis of their location and climatic conditions. These are Tropical Hardwood forests, Grass lands, Deserts and Temperature softwood forests. 2.QUESTION Name some commo…
Read moreCHAPTER 23 MARKETS AROUNDS US (D)ANSWER THE FOLLOWING QUESTIONS- 1.Define a market. Name different kinds of markets. Answer- Commonly, market is a place having shops selling vegetables, cloths, stationery etc. In exact term, market can be defined as a place where buyers and sellers engage in the act…
Read more
Copyright (©) 2020 Dr. SANTOSH MISHRA All Rights Reseved
Social Plugin