लालकृष्ण आडवाणी: भारतीय राजनीति के सजग प्रहरी और विचारशील नेता (जन्म- 8 नवम्बर 1927 )
परिचय:
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति के उन विशिष्ट नेताओं में से हैं जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारतीय लोकतंत्र के विकास, विचारधारा के पुनरुत्थान और राष्ट्रवादी राजनीति के विस्तार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे न केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संस्थापक स्तंभों में से एक हैं, बल्कि संगठन और विचार के स्तर पर उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी। उनके जीवन में अनुशासन, विचारशीलता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिलता है
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवम्बर 1927 को कराची (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। उनका परिवार सिंधी समुदाय से था और उनके पिता कृष्णचंद आडवाणी शिक्षा क्षेत्र से जुड़े थे। प्रारंभिक शिक्षा सेंट पैट्रिक हाई स्कूल, कराची से प्राप्त करने के बाद उन्होंने डी.जी. नेशनल कॉलेज, हैदराबाद (सिंध) से स्नातक किया। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और वे राजस्थान के अजमेर में बस गए।
उनके जीवन का प्रारंभिक दौर भारतीय संस्कृति, धर्म और राष्ट्रीय चेतना से प्रभावित था। इसी दौरान वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े, जिसने उनके राजनीतिक और वैचारिक जीवन की दिशा निर्धारित की।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत
आडवाणी ने अपना राजनीतिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रारंभ किया और बाद में 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ मिलकर संगठन को मजबूत किया।
1950–70 के दशक में वे दिल्ली और राजस्थान में संगठनात्मक कार्यों में लगे रहे और धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति के मंच पर उभरते गए। 1970 में वे राज्यसभा के सदस्य बने। आपातकाल (1975–77) के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई और जेल भी गए।
जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी तक
1977 में जनसंघ ने जनता पार्टी के रूप में अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और सत्ता में आया। परंतु विचारधारात्मक मतभेदों के कारण 1980 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गठन हुआ। लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी इस नई पार्टी के प्रमुख नेता बने।
आडवाणी ने पार्टी को वैचारिक दृढ़ता, संगठनात्मक अनुशासन और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण प्रदान किया। उन्होंने भाजपा को एक छोटे राजनीतिक दल से उठाकर राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख केंद्र बना दिया।
राम जन्मभूमि आंदोलन और राष्ट्रीय पहचान
1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया। उनकी प्रसिद्ध “राम रथ यात्रा” ने देशभर में भारतीय संस्कृति और आस्था के प्रति नई चेतना जगाई। इस आंदोलन ने भाजपा को जनसमर्थन के शिखर पर पहुंचाया।
उनका यह आंदोलन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रतीक था, जिसमें उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत की आत्मा उसकी सांस्कृतिक एकता में निहित है।
सत्ता में भूमिका और योगदान
1998 में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनी, तब आडवाणी उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद निरोधक नीति और कश्मीर नीति में ठोस निर्णय लिए।
उनकी पहचान एक दृढ़, अनुशासित और दूरदर्शी प्रशासक की रही। उन्होंने आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और सुशासन के क्षेत्र में भारत की नीतियों को मजबूत किया।
विचारधारा और दृष्टिकोण
लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक दर्शन संस्कृति आधारित राष्ट्रवाद पर टिका है। वे मानते हैं कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत है, जिसकी आत्मा में धर्म, नैतिकता और कर्तव्य बोध रचा-बसा है।
उन्होंने भारतीय लोकतंत्र में विचार की राजनीति को पुनर्स्थापित किया। उनकी राजनीति व्यक्तित्व आधारित नहीं, बल्कि विचार आधारित रही।
लेखन और बौद्धिक योगदान
आडवाणी एक प्रखर वक्ता और लेखक भी हैं। उनकी आत्मकथा “My Country, My Life” (2008) उनके विचारों, संघर्षों और राजनीतिक यात्रा का सजीव दस्तावेज है। यह पुस्तक भारतीय राजनीति के छह दशकों का जीवंत इतिहास प्रस्तुत करती है।
सम्मान और पुरस्कार
भारत सरकार ने उनके दीर्घ राजनीतिक और सामाजिक योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें “भारत रत्न” (2024) से सम्मानित किया — यह भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान उनकी राष्ट्रभक्ति, ईमानदारी और सेवा भावना का प्रमाण है।
व्यक्तित्व और विरासत
लालकृष्ण आडवाणी का व्यक्तित्व संयम, सौम्यता और वैचारिक दृढ़ता का प्रतीक है। वे एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने सत्ता से अधिक संगठन, और लोकप्रियता से अधिक विचारों को महत्व दिया।
उनकी विरासत केवल भाजपा तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारतीय राजनीतिक इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने यह दिखाया कि राजनीति में भी नैतिकता, आदर्श और सेवा का स्थान सर्वोपरि है।
उपसंहार
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय लोकतंत्र के उन महानायकों में हैं जिन्होंने विचार और कर्म से राजनीति को नई ऊँचाइयाँ दीं। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा, संगठन निर्माता और लोकतंत्र के प्रहरी हैं।
उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्र निर्माण केवल सत्ता से नहीं, बल्कि समर्पण, ईमानदारी और वैचारिक निष्ठा से होता है।
“लालकृष्ण आडवाणी—विचार, विश्वास और राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक।”

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